उत्पत्ति (Genesis) बाइबल की पहली पुस्तक है और यह मनुष्य, संसार और परमेश्वर के साथ संबंध के आरंभ की कहानी बताती है। यह पुस्तक हमे यह नहीं सिर्फ इतिहास बताती है, बल्कि यह परमेश्वर के चरित्र, मानवता की वास्तविक ज़रूरत और मुक्ति की शुरुआत को भी प्रकट करती है।
लेखक और लेखन काल
उत्पत्ति का लेखक पवित्र परंपरा के अनुसार मूसा माना जाता है।
यह पुस्तक लगभग 1440–1400 ईसा पूर्व लिखी गई थी — मिस्र से निकलने (Exodus) और सीनै के जंगल में विचरण के समय।
मुख्य उद्देश्य
उत्पत्ति का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि:
परमेश्वर सर्वशक्तिमान, शाश्वत, और सभी का सृष्टिकर्ता हैं।
मनुष्य को परमेश्वर के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध के लिए बनाया गया था।
पाप ने संसार को बिखेर दिया, परन्तु परमेश्वर की योजना में मुक्ति और वाचा का मार्ग शामिल है।
पुस्तक का विभाजन
उत्पत्ति को दो बड़े विभागों में बाँटा जा सकता है:
आदिकालीन इतिहास (Genesis 1–11)
यह भाग पूरे संसार के आरंभ — सृष्टि, मानव का पात, बाढ़, और जातियों के विस्तार को प्रस्तुत करता है।
सृष्टि का वर्णन — परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी रची।
आदम और हव्वा का पाप — पाप ने संसार में दुःख और मृत्यु ला दी।
नूह और बाढ़ — परमेश्वर ने बुराई मिटाने के लिए जल प्रलय भेजा पर नूह को बचाया।
भाषा और जाति का विभाजन — बाबेल से सारी पृथ्वी फैल गई।
पैतृक इतिहास (Genesis 12–50)
परमेश्वर की वाचा की शुरुआत अब्राहम से होती है और इसके बाद यह इस वाचा की कहानी है:
अब्राहम का जीवन और वादा — परमेश्वर ने उसे विशाल वंश, भूमि, और आशीर्वाद का वादा दिया।
इसहाक और याकूब — वाचा अगली पीढ़ियों तक बढ़ती है।
यूसुफ का उत्कर्ष — यूसुफ को भाईयों ने मिस्र बेच दिया, पर परमेश्वर ने बुराई में भी भलाई निकाल दी।
प्रमुख वाचाएँ और अर्थ
उत्पत्ति में कई महत्त्वपूर्ण पवित्र वचन हैं:
उत्पत्ति 1:1 – “आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी को रचा।” यह दर्शाता है कि परमेश्वर सबका स्रोत और आरंभ है।
उत्पत्ति 3:15 – शैतान और स्त्री के वंश के मध्य विरोध की भविष्यवाणी, जो मसीह में पूर्ण होती है।
उत्पत्ति 12:2–3 – परमेश्वर का वादा कि सभी जातियाँ अब्राहम के द्वारा आशीष पाएंगी।
उत्पत्ति 50:20 – “तुमने बुरा सोचा, पर परमेश्वर ने भला किया।” यह परमेश्वर की सार्वभौमिक योजना को दिखाता है।
मुख्य विषय और संदेश
उत्पत्ति हमें यह सिखाती है कि:
परमेश्वर हर चीज़ का आरंभ करता है और उसकी योजना अपरिवर्तनीय है।
मानवता का पाप संसार में दुःख का कारण बना, पर परमेश्वर की योजना में उद्धार का मार्ग भी शामिल है।
परमेश्वर ने निश्चित वाचा की, और वह इसे निभाता है – चाहे पाप, संघर्ष, या समय कितना भी बड़ा क्यों न हो।
व्यावहारिक अर्थ (Practical Application)
उत्पत्ति में सिखाया गया सबसे बड़ा सत्य यह है कि:
हम सब परमेश्वर के सामने जिम्मेदार हैं।
पाप मनुष्य को विभाजित करता है, पर परमेश्वर की दया में उद्धार और नया आरंभ है।
परमेश्वर हमेशा अपने वादों पर खरा उतरता है।
उत्पत्ति की पुस्तक वह कहानी है जिसमें परमेश्वर ने संसार की रचना की, मनुष्य की गरिमा और पतन दिखाया, पर अपनी वाचा में प्रेम और उद्धार की आशा दी। यह न केवल इतिहास है, बल्कि हर मनुष्य के जीवन के लिए मार्गदर्शक भी है — जहाँ प्रेम, न्याय, पाप और उद्धार की कहानी शुरू होती है।